परमपरागत तरीके से मनाई गई राजराजेश्वर सहस्त्रबाहु जयंती

लखीमपुर खीरी। कस्बे के हैहेयवंशीय क्षत्रिय, कसेरा, ठठेरा ताम्रकार स्वजातीय बंधुओं द्वारा बड़ी धूम-धाम से जनता धर्मशाला में सहस्रबाहु जयंती मनाई गई। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी समाज के सुनील कसेरा व रामप्रताप सिंह द्वारा राजराजेश्वर सहस्रार्जुन महाराज की चित्र की पूजाअर्चना करते हुए तिलक कर पुष्प अर्पित किए और मिष्ठान का भोग लगा कर सभा में उपस्थित जनों को प्रसाद वितरित किया गया।
इस दौरान हैहेयवंशीय कसेरा समाज के वरिष्ठ राम प्रताप सिंह ने सभा में उपसिथत लोगों को राज राजेश्वर सहस्रार्जुन महाराज जी के जीवन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सहस्त्रबाहु जयंती मनाई जाती है, भगवत पुराण में भगवान विष्णु व लक्ष्मी द्वारा सहस्त्रबाहु महाराज की उत्पत्ति की जन्मकथा का वर्णन है। उन्होंने विष्णु भगवान की कठोर तपस्या करके 10 वरदान प्राप्त किए और चक्रवर्ती सम्राट की उपाधि धारण की। वे भगवान विष्णु के 24वें अवतार माने गए हैं। हैहयवंशी क्षत्रियों में ये वंश सर्वश्रेष्ठ उच्च कुल का क्षत्रिय माना गया है। चन्द्र वंश के महाराजा कार्तवीर्य के पुत्र होने के कारण उन्हें कार्तवीर्य-अर्जुन कहा जाता है। उनका जन्म हैहेयवंशी महाराज की 10वीं पीढ़ी में माता पद्मिनी के गर्भ से हुआ था। वे इतने वीर थे कि रावन को बंधक बनाकर उन्होंने अपने बच्चों को उससे खेलने के लिए दे दिया था। उनका जन्म नाम एकवीर तथा सहस्रार्जुन भी है। वो भगवान दत्तात्रेय के भक्त थे और दत्तात्रेय की उपासना करने पर उन्हें सहस्र भुजाओं का वरदान मिला था। इसलिए उन्हें सहस्त्रबाहु अर्जुन के नाम से भी जाना जाता है। सहस्रार्जुन जयंती क्षत्रिय धर्म की रक्षा एवं सामाजिक उत्थान के लिए मनाई जाती है। इस अवसर पर राम सिंह रामू, सुशील कसेरा, पंकज कसेरा, कुलदीप सिंह, योगेंद्र कुमार बड़कऊ, विजय सिंह, कन्हैया कसेरा समेत समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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